नूरपुर पंजनहेड़ी गोलीकांड: तहसीलदार की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
हरिद्वार। नूरपुर पंजनहेड़ी में गत 28 जनवरी को हुई गोलीकांड की घटना को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
मातृ सदन ने प्रेस नोट जारी कर तहसीलदार की भूमिका पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए उन्हें प्राथमिकी (FIR) में शामिल करने और निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
मातृ सदन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में के अनुसार, उषा टाउनशिप की भूमि के प्रशासनिक सर्वेक्षण के दौरान टाउनशिप स्वामी अमित चौहान ने अधिकारियों की मौजूदगी में कहा कि घटना से लगभग पांच दिन पहले तहसीलदार एक पटवारी के साथ स्थल पर पहुंचे थे और मौखिक रूप से भूमि में कोई अवैधता न होने की बात कही थी।
आरोप है कि यह सर्वे बिना शिकायतकर्ता को सूचना दिए किया गया।
प्रेस नोट में बताया गया कि हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण ने 17 जनवरी को भूमि सर्वेक्षण का आदेश दिया था, लेकिन 27 जनवरी तक मातृ सदन को इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई।
उसी दिन तहसील कार्यालय में पूछताछ के दौरान तहसीलदार ने सर्वे से इनकार किया और तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसकी पुष्टि कार्यालय की सीसीटीवी फुटेज से होने का दावा किया गया है।
प्रेस नोट में यह भी कहा गया कि 27 जनवरी को ही पटवारी द्वारा ब्रह्मचारी सुधानंद को अगले दिन सुबह 10 बजे सर्वे की सूचना दी गई।
28 जनवरी को करीब 10:10 बजे गोलीकांड की घटना हुई, जिसके तुरंत बाद तहसीलदार द्वारा ब्रह्मचारी सुधानंद को मौके पर आने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया गया है।
मातृ सदन का कहना है कि इन परिस्थितियों से तहसीलदार की मंशा और भूमिका पर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है, इसलिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
मातृ सदन की प्रमुख मांगें
- तहसीलदार का नाम तत्काल प्राथमिकी में जोड़ा जाए।
- कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और गतिविधियों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
- जांच पूरी होने तक उन्हें निलंबित किया जाए।
- दोष सिद्ध होने पर कठोर कार्रवाई की जाए।

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