PMSMA के 10 वर्ष पूर्ण: उत्तराखंड में 6,997 गर्भवती महिलाओं को मिला लाभ, उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की पहचान पर विशेष जोर
देहरादून। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के 10 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर उत्तराखंड में विशेष जागरूकता एवं स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम आयोजित किए गए।
राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 9 जून 2026 को आयोजित विशेष अभियान के तहत प्रदेशभर में 6,997 गर्भवती महिलाओं को प्रसवपूर्व जांच (ANC) एवं परामर्श सेवाएं प्रदान की गईं।
भारत सरकार द्वारा 9 जून 2016 को शुरू किए गए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच सेवाएं उपलब्ध कराना, उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं (High Risk Pregnancy) की समय पर पहचान सुनिश्चित करना तथा
मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) में कमी लाना है। अभियान के तहत प्रत्येक माह की 9 तारीख को विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क जांच और परामर्श दिया जाता है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार विशेष अभियान के दौरान 4,021 महिलाओं की आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में तथा 3,129 महिलाओं की अन्य PMSMA स्वास्थ्य संस्थानों में जांच की गई।
इस दौरान 709 उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं (HRP) की पहचान की गई, जबकि 748 गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। साथ ही 613 हाई रिस्क मामलों का प्रबंधन और रेफरल भी सुनिश्चित किया गया।
PMSMA के अंतर्गत गंभीर एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, थायरॉइड विकार, HIV/सिफलिस संक्रमण, टीबी, हृदय रोग, गर्भकालीन मधुमेह और अन्य जटिलताओं से प्रभावित गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी की जाती है।
विभाग के अनुसार राज्य में PMSMA पोर्टल के माध्यम से अब तक 2,09,125 गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान ने राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत आधार प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रत्येक गर्भवती महिला तक सुरक्षित मातृत्व, समय पर जांच और गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करना है, जिससे मातृ मृत्यु दर में और कमी लाई जा सके।
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि PMSMA के माध्यम से उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान और प्रबंधन संभव हुआ है। नियमित एएनसी जांच, विशेषज्ञ परामर्श और सुदृढ़ रेफरल व्यवस्था ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार किया है।
स्वास्थ्य विभाग के सचिव डॉ. विनय शंकर पांडेय ने बताया कि राज्य में PMSMA के साथ डिजिटल निगरानी, पोर्टल आधारित ट्रैकिंग और संस्थागत रेफरल व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है, जिससे प्रत्येक गर्भवती महिला को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि PMSMA और अन्य मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप उत्तराखंड में मातृ स्वास्थ्य संकेतकों में लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है। NFHS-6 के आंकड़ों में भी संस्थागत प्रसव, एएनसी कवरेज और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार देखने को मिला है।

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