निरंजनी और जूना अखाड़े के बीच बढ़ती दूरियां, जानिए क्या है तकरार की वजह?
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के संत समाज में निरंजनी अखाड़े और जूना अखाड़े के बीच संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
दोनों प्रमुख अखाड़ों के बीच कथित तौर पर बढ़ती दूरियों को लेकर संत समाज और धार्मिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर दोनों अखाड़ों के बीच ऐसा क्या हुआ, जिससे आपसी संबंधों में दूरी की चर्चा सामने आने लगी है?
बुधवार को जूना अखाड़े की पारंपरिक छड़ी यात्रा में निरंजनी अखाड़े के संतों का न पहुंचना इस बात की ओर पुख्ता करता है जिसमें दोनों के बीच तकरार की बात कही जा रही थी।
ऐसे में जब जूना अखाड़े के संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरी महाराज से पूछा गया तो उन्होंने इसे वैचारिक भिन्नता कहते हुए “न कोई अपना शत्रु है और न कोई अपना मित्र” की बात कही तो दोनों अखाड़ों के बीच आई दरार सबको दिखने लगी।
हालांकि इस विषय पर निरंजनी अखाड़े ने अभी चुप्पी साध रखी है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से जुड़े दोनों अखाड़े सनातन परंपरा, धार्मिक आयोजनों और कुंभ जैसे बड़े पर्वों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हरिद्वार की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान में भी इन अखाड़ों का विशेष स्थान है। ऐसे में इनके बीच किसी भी तरह के मतभेद की चर्चा स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान खींचती है।
क्या रही होगी दरार की वजह?
बताया जा रहा है कि दोनों अखाड़े के बीच जापान से आए संत के महामंडलेश्वर बनाए जानेक लेकर सहमति हुई जिसके बाद दोनों अखाड़े ने एक दूसरेस मुंह फेर लिया हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं की है।


More Stories
Haridwar Kumbh 2027 से पहले धर्मनगरी का मेकओवर! एक रंग एक रूप में दिखेगा शहर
National Unity Day उत्तराखंड के सभी थानों में होगा ‘एकता परेड-2026’ का सीधा प्रसारण
International Film निर्माताओं के प्रतिनिधिमंडल ने सीएम पुष्कर सिंह धामी से की मुलाकात