नया उदासीन अखाड़ा की आपसी कलह के चलते अखाड़ा परिषद की गुटबाजी हुई तेज
श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़े के संतों का दूसरे अखाड़ों से समर्थन की चलाई मुहीम
हरिद्वार। आगामी हरिद्वार कुंभ मेले से पहले नया उदासीन अखाड़े के भीतर चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पहले असली और नकली संतों को लेकर उठे विवाद के बाद अब मामला “असली और नकली देवताओं” तक पहुंच गया है। इस नए विवाद ने अखाड़ा परिषद की राजनीति को और गर्मा दिया है तथा कुंभ मेले की तैयारियों के बीच संत समाज में नई बहस छेड़ दी है।
पंजाब के संतों ने लगाए गंभीर आरोप
उत्तरी हरिद्वार स्थित एक आश्रम में नया उदासीन अखाड़ा से जुड़े पंजाब के संतों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में संतों ने आरोप लगाया कि हरिद्वार स्थित नया उदासीन अखाड़ा में वर्षों से जिन देव स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जा रही है, वे वास्तविक देवता नहीं हैं। उनका दावा है कि अखाड़े के असली देवता पंजाब में विराजमान हैं और वहीं उनकी विधिवत पूजा होती है। संतों ने यह भी आरोप लगाया कि अब तक कुंभ मेलों में भी इन्हीं कथित नकली देवताओं का शाही स्नान कराया जाता रहा, जिससे वास्तविक देवताओं का सम्मान प्रभावित हुआ है।
तीन राज्यों से जांच कराने की मांग
वहीं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सरकार इस पूरे प्रकरण की जांच कराएं ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक परंपराओं से जुड़े ऐसे मामलों का समाधान तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होना चाहिए।
अब संत समाज और प्रशासन की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस विवाद का समाधान किस तरह निकलता है और आगामी कुंभ मेले की धार्मिक परंपराओं पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है। साथ ही, सरकार और संबंधित धार्मिक संस्थाएं इस मामले में क्या रुख अपनाती हैं, इस पर भी सभी की नजर रहेगी।

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