February 5, 2026

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Uttrakhand government construct minority education authority

उत्तराखंड में बन गया राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण, जानिए इसके फायदे

धामी सरकार ने किया उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन

जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड होगा समाप्त, नया प्राधिकरण तय करेगा सिलेबस

देहरादून।
उत्तराखंड सरकार ने राज्य की अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा की गई घोषणा के अनुसार जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया जाएगा और सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को नई व्यवस्था के तहत लाया जाएगा।

विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री ने पिछले विधानसभा सत्र में मदरसा बोर्ड को समाप्त करने की घोषणा की थी। इसके तहत सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अंब्रेला में लाया जाएगा और उनकी मान्यता उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से की जाएगी।

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डॉ. पराग ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार गठित इस प्राधिकरण में विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों को शामिल किया गया है, जो अल्पसंख्यक Uttrakhand government construct minority education authority विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक पाठ्यक्रम (सिलेबस) तय करेंगे।

प्राधिकरण की संरचना

उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण में—

  • डॉ. सुरजीत सिंह गांधी को अध्यक्ष
  • प्रो. राकेश जैन, डॉ. सैय्यद अली हमीद, प्रो. पेमा तेनजिन, डॉ. एल्बा मेड्रिले, प्रो. रोबिना अमन, प्रो. गुरमीत सिंह को सदस्य
  • समाजसेवी राजेंद्र बिष्ट और सेवानिवृत्त अधिकारी चंद्रशेखर भट्ट को भी सदस्य बनाया गया है।

इसके अलावा निदेशक महाविद्यालय शिक्षा, निदेशक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण तथा निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण भी प्राधिकरण के सदस्य होंगे।

Uttrakhand government construct minority education authority मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा—

“हमारी सरकार ने राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन का फैसला लिया है। मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय पहले ही लिया जा चुका है। अब यह प्राधिकरण तय करेगा कि अल्पसंख्यक बच्चों को कैसी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाएगी। सभी अल्पसंख्यक संस्थानों को उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेनी होगी।”

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