Haridwar News हरिद्वार में पंडित जी के चक्रव्यूह में फँस गया “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस” उपेक्षित रहे उत्तरांचल पंजाबी महासभा के पदाधिकारी, लास्ट में फैल गया सियासी रायता।
सीएम धामी ने इशारो ही इशारों में समझाया अपनी राजनीतिक कुशलता का पाठ
अचानक पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार से सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत,राजनीतिक कानाफूसी रही हावी
हरिद्वार। विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले लाखों लोगों की स्मृति को नमन करने के लिए आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का कार्यक्रम हरिद्वार में इतिहास की पीड़ा से ज्यादा सियासी उठापटक को लेकर चर्चा में आ गया।
देखें वीडियो में कितनी अदावत से मिल रहे है सीएम धामी और सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत
कार्यक्रम की जिम्मेदारी कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा को दी गई थी, लेकिन आयोजन के दौरान सामने आए घटनाक्रमों ने भाजपा की अंदरूनी राजनीति और पंडित जी के चक्रव्यूह में फंसते हुए कई सवाल खड़े करती नजर आई।
विभाजन की विभीषिका के कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चा है। लेकिन कुछ सवाल ऐसे है जिनके जवाब में उत्तरांचल पंजाबी महासभा के पास चेहरे पर मुस्कान और चुप्पी है। जानिए कार्यक्रम के वे पहलू जिनकी चकल्लस हो रही है!
ऐन वक्त पर बदला कार्यक्रम का संचालन
कार्यक्रम के संचालन को लेकर भी अंतिम समय में बदलाव देखने को मिला। जानकारी के अनुसार पहले कार्यक्रम का संचालन विमल कुमार को करना था, लेकिन ऐन मौके पर संचालन की जिम्मेदारी पंडित जी के करीबी करते हुए दिखाई दिए।
संचालन में हुए इस बदलाव ने आयोजन की तैयारियों और समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए। कार्यक्रम जैसे-जैसे आगे बढ़ा, मंचीय व्यवस्थाओं को लेकर भी कई लोग असहज नजर आए।
पंजाबी महासभा के पदाधिकारी मंच पर रहे आउट ऑफ़ फोकस
विभाजन की त्रासदी का सबसे गहरा दर्द झेलने वाले समाजों में पंजाबी समाज प्रमुख रहा है। ऐसे में कार्यक्रम में उत्तरांचल पंजाबी महासभा से जुड़े पदाधिकारियों को मंच से अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिलना चर्चा का विषय बन गया। प्रदेश अध्यक्ष सहित तमाम बड़े पदाधिकारी मंच पर एक किनारे बैठे हुए दिखाई दिए।
पंजाबी समाज से जुड़े संतों की अनदेखी!
पंजाबी समाज से जुड़े संतों की मंच पर कथित उपेक्षा को लेकर भी समाज के लोगों में नाराजगी दिखाई दी। कार्यक्रम का विषय ही विभाजन की विभीषिका की स्मृतियों से जुड़ा था, ऐसे में पंजाबी समाज की अपेक्षा थी कि उसके प्रतिनिधियों और संतों को मंच पर उचित स्थान और सम्मान मिले।
धामी के भाषण में विभाजन की विभीषिका कहां थी?
सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उद्बोधन को लेकर हुई।
कार्यक्रम का मूल विषय था—विभाजन विभीषिका की पीड़ा, विस्थापन, बलिदान और उन परिवारों की स्मृतियां, जिन्होंने देश के विभाजन का असहनीय दर्द झेला।
लेकिन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के भाषण को लेकर मौजूद लोगों के बीच यह चर्चा रही कि उनका संबोधन विभाजन की त्रासदी के बजाय राजनीतिक मुद्दों पर ज्यादा केंद्रित रहा।
विशेष रूप से राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के संदर्भों को लेकर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम में मौजूद कुछ लोगों का मानना था कि ऐसे अवसर पर राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा उन परिवारों और पीड़ितों की स्मृतियों को केंद्र में रखा जाना चाहिए था, जिन्होंने विभाजन का दंश झेला।
‘सीएम का भाषण सुनकर दुख हुआ’—सुनील अरोड़ा
कार्यक्रम के बाद उत्तरांचल पंजाबी महासभा से जुड़े पदाधिकारियों में नाराजगी की बात सामने आई।
महासभा के पदाधिकारी सुनील अरोड़ा ने मुख्यमंत्री के उद्बोधन को लेकर निराशा जताते हुए कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस जैसे कार्यक्रम में समाज को उम्मीद थी कि विभाजन की पीड़ा और पीड़ित परिवारों की बात प्रमुखता से रखी जाएगी।
उनका कहना था कि मुख्यमंत्री का भाषण सुनकर उन्हें दुःख हुआ, क्योंकि कार्यक्रम की मूल भावना और पंजाबी समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप चर्चा नहीं हो सकी।
त्रिवेंद्र सिंह रावत की मौजूदगी बनी चर्चा का विषय?
दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत का आज के प्रोटोकॉल के मुताबिक भगवानपुर में अलग अलग कार्यक्रम में शिरकत करना था, लेकिन अचानक विभाजन विभीषिका में पहुंचे तो सीएम धामी के साथ उनके मिलने का वीडियो भी अचानक सोशल मीडिया में जगह बनाता हुआ नजर आया।

More Stories
युवा कांग्रेस 66वां स्थापना दिवस हरिद्वार में उत्साह के साथ मनाया गया
जंतर मंतर की घटना पर हरिद्वार में भी आक्रोश, सड़क पर कांग्रेस -सपा
Haridwar Bjp – पार्टी से अलग होकर गुर्जर समाज को एकजुट कर प्रमोद खारी करेंगे ये बड़ा काम