February 27, 2026

24x7breakingpoint

Just another WordPress site

pod-texi-in-haridwar- secretary Aavas visited project site in Haridwar

Pod Texi in Haridwar 21 किलोमीटर के रूट पर बनेंगे 21 स्टेशन

Pod Texi in Haridwar 21 किलोमीटर के रूट पर बनेंगे 21 स्टेशन

आवास सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने किया हरिद्वार में स्थलीय निरीक्षण

हरिद्वार । उत्तराखंड मेट्रो रेल परियोजना के तहत बनने वाले वाली पॉड टैक्सी योजना को लेकर आवास सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने मेट्रो रेल परियोजना के अधिकारियों के साथ स्थलीय निरीक्षण किया।

हरिद्वार सप्त ऋषि से शुरू हुए इस निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने हरिद्वार, हर की पौड़ी, मोतीचूर आदि क्षेत्रों में बनने वाले संभावित स्टेशनों के स्थल का निरीक्षण किया।

आप भी सुने क्या बोले सचिव आवास

प्रबंध निदेशक सहित उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने प्रस्तावित परियोजना के विभिन्न स्थलों का स्थलीय जायजा लिया।

सचिव आर राजेश ने बताया कि कि प्रस्तावित पॉड टैक्सी में कुल 21 स्टेशन बनाए जाने हैं और इसकी कुल लंबाई लगभग 20.74 किलोमीटर होगी।

इस परियोजना को 15 फरवरी 2023 को उत्तराखंड सरकार की मंत्रिमंडल बैठक में अनुमोदन मिल चुका है।

परियोजना के लिए लगभग 4.8743 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित है, जिसमें राजकीय, निजी और रेलवे भूमि शामिल है।

उन्होंने कहा कि पॉड टैक्सी को लेकर जन भावनाओं का ध्यान रखते हुए स्थलीय निरीक्षण के बाद सीएम धामी के साथ इस पर चर्चा की जाएगी और इसे जल्द पूरा किए जाने का भी उद्देश्य है।

अधिकारियों ने बताया कि यह मेट्रो सेवा ‘ऑन डिमांड’ आधारित होगी, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इलेक्ट्रिक संचालन होने के कारण प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

pod-texi-in-haridwar- secretary Aavas visited project site in Haridwar चालक रहित और पूरी तरह स्वचालित प्रणाली होने से मानव संसाधन लागत भी कम होगी तथा दुर्घटनाओं की संभावना भी घटेगी।

निरीक्षण के दौरान भारत माता मंदिर क्षेत्र से शुरुआत करते हुए शांतिनगर, मोतीचूर, खड़खड़ी, भीमगोड़ा, ललतारो पुल, वाल्मीकि चौक, मनसा देवी रोपवे गेट, हर की पौड़ी और चंडी देवी मंदिर क्षेत्र तक प्रस्तावित स्टेशनों और पार्किंग स्थलों का निरीक्षण किया गया। साथ ही इंटीग्रेटेड रोपवे और प्रस्तावित लोअर टर्मिनल के संबंध में भी विस्तार से चर्चा की गई।

अंत में सचिव स्तर से निर्देश दिए गए कि परियोजना के लिए आवश्यक राजकीय भूमि का अधिग्रहण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, ताकि कार्य समयबद्ध रूप से आगे बढ़ सके।

About The Author