काली मंदिर क्षेत्र में वन भूमि पर कब्जे के प्रयास का आरोप, जांच की मांग
हरिद्वार। काली मंदिर क्षेत्र में कथित रूप से वन भूमि एवं विवादित भूमि पर कब्जे के प्रयास को लेकर शिकायत की गई है जिसमें विभागीय अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग भी की गई है।
यही नहीं क्षेत्र में वन विभाग द्वारा लगाए गए सीमा बोर्डों को पीछे किए जाने को भी गलत बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, हरिद्वार वन प्रभाग को शिकायत भेजी गई है।
शिकायतकर्ता गीतांजलि गिरी ने आरोप लगाया है कि पूर्व में विवाद सामने आने के बाद वन विभाग ने संबंधित क्षेत्र में अपनी सीमा स्पष्ट करने के लिए बोर्ड लगाए थे।
उनका कहना है कि अब उन बोर्डों को पीछे कर दिया गया है, जिससे भूमि पर कब्जे के प्रयासों को बढ़ावा मिलने की आशंका है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि हाल ही में रिटेंशन वॉल निर्माण के नाम पर पहाड़ काटा गया और वहां से निकले मलबे का उपयोग काली मंदिर क्षेत्र में भरान के लिए किया गया।
शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि इससे भूमि का स्वरूप बदला जा रहा है और भविष्य में कब्जे को स्थायी रूप देने की कोशिश हो सकती है।

शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण में वन विभाग और सिंचाई विभाग के कुछ अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
साथ ही यह स्पष्ट करने की मांग की है कि वन विभाग द्वारा लगाए गए बोर्ड किसके आदेश पर हटाए या पीछे किए गए और क्या इसके लिए विधिवत अनुमति एवं सीमांकन कराया गया था।
शिकायत में मांग की गई है कि वन विभाग, राजस्व विभाग और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम से संबंधित भूमि का तत्काल सीमांकन कराया जाए।
जांच पूरी होने तक क्षेत्र में किसी भी प्रकार के निर्माण, भरान, कटान अथवा भूमि के स्वरूप में परिवर्तन पर रोक लगाई जाए।
प्रकरण को लेकर कई वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहे है जिसमें ट्रैक्टर ट्राली से पहाड़ काट कर मलबा मंदिर के अंदर ले जाते हुए दिखाया जा रहा है।
बहरहाल सवाल यह भी उठता है कि पूर्व में वन विभाग के द्वारा लगाया गया हदबंदी का बोर्ड क्यों पीछे किया गया। क्या विभाग ने दबाव में यह किया या फिर किसी को कब्जा करते जाने की नियत से यह मिली भगत है।
कुछ भी हो शिकायत के बाद शासन प्रशासन इसपर किस तरह का कदम उठाता है यह देखना दिलचस्प होगा।

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