कौन है विनय त्यागी और मामूली सी चोरी के क्या है बड़े राज?
सवाल – पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कुख्यात विनय त्यागी पर आखिर क्यों हुआ हमला बड़ा सवाल
चुनौती – कितनी जल्दी खुलेआम हमला करने वाले बदमाशों को गिरफ्तार कर पति है हरिद्वार पुलिस
करोड़ों की चोरी से जुड़ा मामला
गाजियाबाद के एक बड़े ठेकेदार के करोड़ों रुपये के माल की चोरी के मामले में जेल में बंद पश्चिमी यूपी के कुख्यात गैंगस्टर विनय त्यागी पर हुए जानलेवा हमले की वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। यह मामला सामान्य चोरी नहीं, बल्कि भारी मात्रा में काली कमाई और बेनामी संपत्तियों से जुड़ा बताया जा रहा है।
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देहरादून में छिपाई गई थी बेनामी दौलत
सूत्रों के अनुसार, एक बड़े ठेकेदार को आशंका थी कि उसके यहां प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी हो सकती है। इसी डर से उसने अपनी बेनामी संपत्ति—सोना, चांदी, नकदी और करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी के दस्तावेज—एक गाड़ी में भरकर देहरादून में अपने एक करीबी दोस्त, जो पेशे से डॉक्टर है, के यहां छिपा दी।
विनय त्यागी तक कैसे पहुंची जानकारी
बताया जा रहा है कि विनय त्यागी का उस डॉक्टर के यहां आना-जाना था। इसी दौरान उसे इस गुप्त रूप से रखी गई दौलत की जानकारी मिली और मौका पाकर उसने कार से इस कथित काली कमाई को चुरा लिया।
रिपोर्ट में दिखाई गई छोटी चोरी
चोरी का पता चलने पर ठेकेदार की ओर से डॉक्टर के माध्यम से पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई, जिसमें केवल कुछ लाख रुपये की चोरी का जिक्र किया गया। हालांकि, अंदरखाने भरोसेमंद अफसरों की मदद से असली चोरी गए माल की रिकवरी के प्रयास शुरू किए गए।
80 प्रतिशत माल बरामद, दस्तावेज गायब
सूत्रों का दावा है कि विनय त्यागी की गिरफ्तारी के बाद करीब 80 प्रतिशत सोना, चांदी और नकदी बरामद कर ली गई, लेकिन कई सौ करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी के अहम दस्तावेज अब तक नहीं मिल सके। इन्हीं दस्तावेजों को लेकर ठेकेदार की सबसे अधिक चिंता बताई जा रही है।
पुलिस अभिरक्षा में दिनदहाड़े हमला
बुधवार को हरिद्वार के लक्सर क्षेत्र में पुलिस सुरक्षा के बीच दो अज्ञात बाइक सवारों ने विनय त्यागी पर फायरिंग कर दी और मौके से फरार हो गए। पुलिस अभिरक्षा में हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उत्तराखंड पुलिस के लिए बड़ी चुनौती
दिनदहाड़े हुई इस दुस्साहसिक वारदात के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। हमले के पीछे की साजिश, चोरी के असली राज और इसमें शामिल सफेदपोश व खाकीधारियों की भूमिका को उजागर करना अब उत्तराखंड पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।


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