चारधाम यात्रा में आपदा के दौरान यात्रियों की तलाश में मददगार हो सकता है लघु वियरेबल एंटीना
गुरुकुल कांगड़ी के युवा वैज्ञानिक शिव कुमार सिंह का अभिनव शोध, मानव शरीर पर विकिरण के प्रभाव को कम करने पर जोर
हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के युवा वैज्ञानिक एवं शोधार्थी शिव कुमार सिंह ने “डिजाइन ऑफ वियरेबल एंटीना फॉर वायरलेस बॉडी एरिया नेटवर्क” विषय पर शोध कार्य किया है।
यह शोध डॉ. तनुज कुमार गर्ग, निदेशक तथा डॉ. अतुल कुमार वार्ष्णेय, सहायक निदेशक के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में किया गया।
शोधार्थी शिव कुमार सिंह ने बताया कि उनके शोध की देवभूमि उत्तराखंड में विशेष उपयोगिता हो सकती है। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में यात्री दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं।
भूस्खलन, बादल फटने, अचानक बाढ़ और नदी के तेज बहाव जैसी आपदाओं के दौरान कई बार यात्रियों के लापता होने अथवा गंभीर रूप से प्रभावित होने की घटनाएं सामने आती हैं।
ऐसी आपात परिस्थितियों में व्यक्ति की पहचान और उसकी स्थिति का पता लगाने के लिए वियरेबल संचार तकनीक उपयोगी हो सकती है।
शोधार्थी के अनुसार, इस शोध में एंटीना को छोटे आकार में विकसित करने के साथ-साथ मानव शरीर पर पड़ने वाले विकिरण के प्रभाव को कम करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
उनका कहना है कि आधुनिक संचार व्यवस्था में एंटीना का उपयोग लगातार बढ़ रहा है।
ऐसे में मानव शरीर के साथ उपयोग किए जाने वाले एंटीना के आकार और विकिरण संबंधी प्रभाव महत्वपूर्ण विषय हैं।
शोध में कम विकिरण वाले लघु एंटीना की डिजाइन एवं उसकी उपयोगिता पर कार्य किया गया है।
कपड़ों और पहनने योग्य उपकरणों में लगाया जा सकेगा
शिव कुमार सिंह ने बताया कि विकसित किए गए छोटे आकार के एंटीना को कपड़ों, पहनने योग्य उपकरणों अथवा अन्य वियरेबल सामग्री के साथ लगाया जा सकता है।
इसका संभावित उपयोग आपदा प्रबंधन, रेस्क्यू ऑपरेशन और वायरलेस बॉडी एरिया नेटवर्क जैसी तकनीकों में किया जा सकता है।
विशेष परिस्थितियों में शरीर के साथ जुड़े संचार उपकरण के माध्यम से आवश्यक सूचना उपलब्ध कराने की दिशा में यह तकनीक उपयोगी हो सकती है।
सैनिकों की सुरक्षा में भी संभावित उपयोग
शोध निर्देशक डॉ. तनुज कुमार गर्ग ने बताया कि शोधार्थी शिव कुमार सिंह ने एंटीना की उपयोगिता को सुरक्षा एवं रक्षा क्षेत्र से जोड़ने की दिशा में भी कार्य किया है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के वस्त्रों अथवा उनके उपकरणों के साथ छोटे एंटीना लगाए जा सकते हैं।
आपातकालीन स्थिति में किसी सैनिक के घायल होने अथवा लापता होने पर ऐसे वियरेबल संचार उपकरण भविष्य में उसकी पहचान और खोज में सहायता प्रदान कर सकते हैं।
वाई-फाई के साथ ब्लूटूथ कनेक्टिविटी पर भी कार्य
शोध सह-निर्देशक एवं युवा वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार वार्ष्णेय ने बताया कि शोध के दौरान इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि एंटीना वाई-फाई और ब्लूटूथ दोनों संचार माध्यमों के साथ कार्य करने में सक्षम हो।
उन्होंने बताया कि ऐसे दुर्गम अथवा आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जहां वाई-फाई कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है, वहां ब्लूटूथ आधारित संचार व्यवस्था का उपयोग संभावित विकल्प के रूप में किया जा सकता है।
इस प्रकार शोध का उद्देश्य संचार की उपयोगिता को अधिक व्यापक बनाना है।

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