Tulsi Manas Mandir वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी अर्जुन पुरी महाराज को हजारों संतों व भक्तों की मौजूदगी में में समाधि दी गई।
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज, श्रीमहंत हरि गिरि महाराज, श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज, श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज समेत देश भर के संतों ने उनके ब्रह्मलीन होने को अपूरणीय क्षति बताया।
हरिद्वार। भूपतवाला रोड स्थित श्री तुलसी मानस मंदिर सप्त सरोवर के संस्थापक व जूना अखाड़ा के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी अर्जुन पुरी महाराज रविवार को ब्रह्मलीन हो गए थे।
सोमवार को उन्हें सभी 13 अखाड़ों के संतों व हजारों भक्तों की उपस्थिति में मंदिर परिसर में ही उनके उत्तराधिकारी महंत कमलेश्वर पुरी महाराज की देखरेख में विधि-विधान के साथ भू-समाधि दी गई।
उन्हें समाधि देने से पहले उनकी अंतिम यात्रा पूरे हरिद्वार में निकाली गई। उनके अंतिम दर्शन करने के लिए संतों व भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा।
सायं को समाधि पूजन में हजारों संत व भक्त शामिल हुए।
जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि महामंडलेश्वर स्वामी अर्जुन पुरी महाराज का ब्रह्मलीन होना धर्म व आध्यात्मिक जगत की अपूरणीय क्षति है।
जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक व अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री हरि गिरि महाराज ने कहा कि महामंडलेश्वर स्वामी अर्जुन पुरी महाराज ने रामकथा के माध्यम से विश्व भर के लोगों को जोड़ने के साथ ही हिंदू धर्म को मजबूत करने का कार्य किया।
उनका ब्रह्मलीन होना धर्म, आध्यात्म, भारतीय संस्कृति, परंपरा व विरासत की ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई कर पाना संभव नहीं है।
जूना अखाड़ा के वरिष्ठ अध्यक्ष श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज ने कहा कि महामंडलेश्वर स्वामी अर्जुन पुरी महाराज का जीवन भक्तों ही नहीं, संतों को भी प्रेरित करता रहेगा।
सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर, जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता एवं दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि जूना अखाड़ा के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी अर्जुन पुरी महाराज ने हरिद्वार में श्री तुलसी मानस मंदिर सप्त सरोवर की स्थापना की, जिसने हरिद्वार, उत्तराखंड व देश ही नहीं, पूरे विश्व को रामभक्ति के दिव्य प्रकाश से आलोकित करने का कार्य किया।
उन्होंने श्री Tulsi Manas Mandir सप्त सरोवर को पूरे विश्व में आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र बनाया। उनकी स्मृति हमेशा भक्तों के दिलों में बनी रहेगी।
जूना अखाड़ा के महामंत्री श्रीमहंत महेश पुरी महाराज, महामंत्री श्रीमहंत शैलेंद्र गिरि महाराज, उपाध्यक्ष श्रीमहंत केदार पुरी महाराज, मंत्री रामेश्वर गिरि महाराज, मंत्री मनोहर पुरी महाराज, मंत्री गिरीशानंद गिरि महाराज, मंत्री आदित्य गिरि महाराज, मंत्री महंत आकाश गिरि महाराज, मंत्री ग्वाल पुरी महाराज, हठयोगी महंत विश्वेश्वरानंद गिरि महाराज, महामंडलेश्वर हरि चेतनानंद गिरि महाराज, सतपाल ब्रह्मचारी, श्रीमहंत शैलजानंद गिरि महाराज, साध्वी विष्णु प्रिया गिरि महाराज, श्रीमहंत पूरण गिरि महाराज, साध्वी पूजा पुरी महाराज,भारत माता मंदिर के श्रीमहंत महामंडलेश्वर ललितानंद गिरि महाराज, थानापति ज्वाला गिरि महाराज समेत हजारों संतों व भक्तों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

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