हरिद्वार। जुना अखाड़े में आयोजित होने वाली धर्म संसद पर संकट के बादल मंडराने लगे है।
बुधवार की देर शाम प्रशासन की चेतावनी के बाद आयोजक के बीच धर्म संसद के आयोजन को लेकर संशय बना हुआ है।
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हालांकि अभी शिवशक्ति धाम डासना के पीठाधीश्वर व श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद ने इस बारे में।किसी भी तरह का कोई अधिकारिक बयान नहीं दिया है।
आपको बता दे कि पहले यह धर्म संसद गाजियाबाद में आयोजित की जानी थी वहां के प्रशासन के द्वारा अनुमति न दिए जाने के बाद इसे हरिद्वार में आयोजित किए जाने की तैयारी थी।
जिसको लेकर आयोजकों द्वारा जुना अखाड़े में मां बगुलामुखी का यज्ञ आयोजित किया जा रहा था और यज्ञ की समाप्ति के बाद धर्म संसद के आयोजन की तैयारी थी।
जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से ही वार्ता के बाद धमकी से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को रक्त से पत्र लिखा।
रक्त से पत्र में उन्होंने लिखा वो और उनके कुछ साथी बांग्लादेश, पाकिस्तान सहित भारत में हिंदुओं के चल रहे नृशंस नरसंहार से व्यथित होकर उनकी पीड़ा को दुनिया भर तक पहुंचाने के लिए माया देवी मंदिर श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े में 19,20 और 21 दिसंबर 2024 को विश्व धर्म संसद का आयोजन कर रहे हैं।हमारा यह आयोजन किसी सार्वजनिक स्थान पर नहीं बल्कि हमारे अखाड़े के मुख्यालय पर हो रहा है।
यह कोई भीड़ एकत्रित करके शक्ति प्रदर्शन करने का कोई राजनैतिक कार्यक्रम नहीं है बल्कि सीमित संख्या में संतों और प्रबुद्ध नागरिकों का एक छोटा सा सम्मेलन है।
मंदिर के अंदर होने वाले ऐसे किसी कार्यक्रम के लिए कोई अनुमति की आवश्यकता नहीं है।परन्तु हरिद्वार के प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी शायद हम हिंदुओ को दोयम दर्जे का नागरिक मानते हैं और हम पर इसके लिए अनुमति मांगने का दबाव बना रहे हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि यह बहुत जरूरी है तो उन्हें बांग्लादेश पाकिस्तान सहित भारत में अपने धर्म बंधुओं के नृशंस नरसंहार पर विलाप करने के लिए 19,20 और 21 दिसंबर 2024 को माया देवी मंदिर श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े में विश्व धर्म संसद आयोजित करने की अनुमति प्रदान करने की कृपा करें।


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