Drugs and Cosmetics Act सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: एक्ट के तहत अपराधों की सुनवाई केवल सेशंस कोर्ट में
नई दिल्ली। Drugs and Cosmetics Act, 1940 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है।
कोर्ट ने कहा कि इस एक्ट के चैप्टर IV के अंतर्गत आने वाले अपराधों की सुनवाई किसी मजिस्ट्रेट द्वारा नहीं, बल्कि सेशंस कोर्ट से कम स्तर की अदालत में नहीं की जा सकती।
न्यायमूर्ति और न्यायमूर्ति की पीठ ने स्पष्ट किया कि धारा 32(2) में स्पष्ट प्रावधान है कि चैप्टर IV के तहत दंडनीय अपराधों की सुनवाई सेशंस कोर्ट से नीचे की अदालत नहीं कर सकती।
क्या था मामला?
मामला M/S SBS Biotech & Others vs State of Himachal Pradesh से जुड़ा है। कंपनी के खिलाफ आरोप था कि उसने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स नियम, 1945 की शेड्यूल M और शेड्यूल U के तहत आवश्यक रिकॉर्ड का रखरखाव सही ढंग से नहीं किया।
ड्रग इंस्पेक्टर की जांच में निर्माण, परीक्षण और वितरण से जुड़े रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। इसके बाद अभियोजन स्वीकृति मिलने पर शिकायत दर्ज की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा…….
- धारा 18(a)(vi) के उल्लंघन के आरोप चैप्टर IV के अंतर्गत आते हैं।
- ऐसे अपराधों की सुनवाई केवल सेशंस कोर्ट में ही संभव है।
- धारा 36-A का हवाला देकर मजिस्ट्रेट को अधिकार नहीं दिया जा सकता यदि मामला चैप्टर IV से संबंधित हो।
- हाईकोर्ट द्वारा कार्यवाही रद्द करने से इनकार करने के फैसले में कोई त्रुटि नहीं पाई गई।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अपराध चैप्टर IV के तहत दंडनीय है, तो वह समरी ट्रायल के दायरे में नहीं आएगा और न ही उसे केवल JMFC द्वारा निपटाया जा सकता है।
निर्णय का महत्व
यह फैसला फार्मा कंपनियों, ड्रग निर्माताओं और नियामक एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण है। इससे स्पष्ट हो गया है कि ड्रग निर्माण और बिक्री से जुड़े गंभीर उल्लंघनों में कठोर न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।


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