दिल्ली पुलिस ANTF को बड़ी कामयाबी उत्तराखंड सहित कई राज्यों में फैला ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़, 7 गिरफ्तार
नई दिल्ली। संगठित मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस ANTF की क्राइम ब्रांच की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में फैले एक अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।
इस कार्रवाई में 48 किलोग्राम से अधिक ट्रामाडोल, अल्प्राजोलाम समेत अन्य साइकोट्रॉपिक पदार्थ बरामद किए गए हैं और 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
यह कार्रवाई एफआईआर संख्या 273/25, धारा 22 एनडीपीएस एक्ट के तहत थाना क्राइम ब्रांच में दर्ज मामले से जुड़ी है।
48 किलो से ज्यादा नशीली दवाइयों की बरामदगी
एएनटीएफ, दिल्ली के डीसीपी संजीव कुमार यादव (आईपीएस) ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि प्रारंभिक जांच में एक सुव्यवस्थित सप्लाई चेन का खुलासा हुआ है, जो स्थानीय स्तर से लेकर अंतरराज्यीय सिंडिकेट तक फैली हुई थी। यह नेटवर्क बिना डॉक्टर की पर्ची के प्रतिबंधित साइकोट्रॉपिक दवाओं की अवैध बिक्री कर रहा था।
खुफिया सूचना से शुरू हुई जांच
सितंबर 2025 में सब-इंस्पेक्टर विकासदीप को अवैध रूप से बड़ी मात्रा में साइकोट्रॉपिक पदार्थों की आवाजाही की गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद निगरानी के दौरान एएसआई कुलदीप की अगुवाई में टीम ने लाजपत नगर, दिल्ली से अनिरुद्ध नामक आरोपी को पकड़ा और उसके पास से करीब 2 किलो ट्रामाडोल पाउडर बरामद किया।
लगातार छापेमारी, कई राज्यों में कार्रवाई
तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी के आधार पर एएनटीएफ ने एसीपी सतेन्द्र मोहन की निगरानी में विशेष टीम गठित की। इंस्पेक्टर नितेश कुमार के नेतृत्व में टीम ने हजारों किलोमीटर तक विभिन्न राज्यों में छापेमारी कर नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा।
उत्तर प्रदेश से मनोज की गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क तेजी से खुलता चला गया। उसके बयान पर दिल्ली से किशन पाल उर्फ भुल्लर को गिरफ्तार किया गया, जिसके घर से 503 ग्राम अल्प्राजोलाम बरामद हुआ। इसके बाद कृष्ण तंवर को चांदनी चौक के पास पकड़ा गया।
हाई स्पीड कार चेज में बड़ी बरामदगी
आगे की जांच में सिंघु बॉर्डर के पास एक कार को रोका गया। हाई-स्पीड चेज के बाद कार से 5.012 किलो ट्रामाडोल बरामद किया गया। चालक की पहचान मनोज कुमार निवासी भिवानी, हरियाणा के रूप में हुई।
आरोपियों की संक्षिप्त प्रोफाइल
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में पैकेजिंग फैक्ट्री संचालक, मेडिकल स्टोर से जुड़े लोग और फार्मा कंपनियों में कार्यरत कर्मचारी शामिल हैं, जो कच्चे माल की आपूर्ति से लेकर अवैध दवाओं की री-पैकेजिंग और सप्लाई तक में सक्रिय थे।
आरोपियों की प्रोफाइल:
1. अनिरुद्ध राय (उम्र – 49 वर्ष):
फरीदाबाद में पैकेजिंग फैक्ट्री चलाता था। पैकेजिंग सामग्री की आपूर्ति की आड़ में अवैध साइकोट्रॉपिक टैबलेट्स की सप्लाई करता था।
2. मनोज राय (उम्र – 62 वर्ष):
अनिरुद्ध राय का रिश्तेदार है। जौनपुर, उत्तर प्रदेश का निवासी है और साइकोट्रॉपिक दवाओं में इस्तेमाल होने वाले पाउडर की अवैध खरीद-फरोख्त में संलिप्त था।
3. किशन पाल उर्फ भुल्लर (उम्र – 62 वर्ष):
पेशे से इलेक्ट्रिशियन रहा है, लेकिन पूर्व में मेडिकल दुकानों से जुड़ा रहा है। एनडीपीएस एक्ट के तहत 20 किलो स्यूडोएफेड्रिन के मामले में पहले दोषी ठहराया जा चुका है। मेडिकल ट्रेड से लंबे समय से जुड़ाव रहा है।
4. कृष्ण तंवर (उम्र – 42 वर्ष):
10वीं तक पढ़ा है। दिल्ली में जन्मा और विभिन्न मेडिकल दुकानों में काम कर चुका है। ड्राइवर के रूप में छिपकर बड़ी मात्रा में साइकोट्रॉपिक पदार्थों की तस्करी करता था। एनडीपीएस एक्ट के तहत 25 किलो स्यूडोएफेड्रिन रखने के मामले में पहले से आरोपी रहा है और फिलहाल जमानत पर है।
5. मनोज कुमार (उम्र – 45 वर्ष):
10वीं तक शिक्षित है और वर्ष 1997 से विभिन्न फार्मा कंपनियों में काम कर चुका है। मूल रूप से हरियाणा का निवासी है और अवैध रूप से साइकोट्रॉपिक पदार्थों की बड़ी खेप एक हाथ से दूसरे हाथ तक पहुंचाकर त्वरित पैसा कमाने के लिए दिल्ली आता-जाता था।
6. प्रशांत (उम्र – 33 वर्ष):
मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला है और बद्दी (हिमाचल प्रदेश) की एक फार्मा कंपनी में कार्यरत है। साइकोट्रॉपिक और अन्य दवाओं के निर्माण में उपयोग होने वाले पाउडर की बड़ी खेप की आवाजाही में मदद करता था।
7. अमित (उम्र – 45 वर्ष):
मूल रूप से उत्तर प्रदेश का निवासी है और वर्तमान में रुड़की में रह रहा है। दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की आपूर्ति में सक्रिय भूमिका निभाता था।
ड्रग फ्री दिल्ली की दिशा में बड़ा कदम
दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई ड्रग फ्री दिल्ली के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।

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