Blood Bank Audit ब्लड ट्रांसफ्यूजन में लापरवाही पर CDSCO का बड़ा एक्शन
नई दिल्ली। देश में ब्लड ट्रांसफ्यूजन से जुड़े गंभीर मामलों के सामने आने के बाद केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने सभी राज्यों में ब्लड बैंकों और रक्त संचरण सेवाओं का देशव्यापी Blood Bank Audit शुरू करने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई वर्ष 2025 में सामने आए उन मामलों के बाद की गई है, जिनमें थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के HIV संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी।
मध्य प्रदेश और झारखंड के मामले बने वजह
मध्य प्रदेश के सतना जिले में 3 से 15 वर्ष आयु के कम से कम 5–6 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के सरकारी अस्पतालों में ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बाद HIV पॉजिटिव पाए जाने का मामला सामने आया था।
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जांच में संक्रमण की पुष्टि संक्रमित डोनर ब्लड से होने की बात सामने आई, जिसके बाद जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी और दो लैब टेक्नीशियनों को निलंबित कर दिया गया।
वहीं झारखंड के चाईबासा सदर अस्पताल सहित अन्य जगहों पर भी इसी तरह के मामले सामने आए, जिन्हें राज्य सरकार ने “बेहद गंभीर जनस्वास्थ्य विफलता” करार दिया।
NHRC ने लिया स्वतः संज्ञान
इन घटनाओं पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दिसंबर 2025 में स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकारों से रिपोर्ट तलब की थी।
इसके बाद केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए ब्लड बैंकों की कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा का फैसला लिया।

देशव्यापी Blood Bank Audit में क्या होंगे प्रमुख निर्देश
CDSCO के अनुसार ऑडिट के दौरान इन बिंदुओं पर सख्ती से अमल कराया जाएगा:
- सभी रक्त यूनिट्स की HIV, हेपेटाइटिस B, हेपेटाइटिस C, मलेरिया और सिफलिस की अनिवार्य जांच
- HIV और हेपेटाइटिस जांच के लिए फोर्थ जेनरेशन ELISA या CLIA टेस्ट अनिवार्य
- प्रोफेशनल डोनर के बजाय स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा
- रिकॉर्ड-कीपिंग, बाहरी गुणवत्ता आश्वासन योजना (EQAS) और डोनर चयन प्रक्रिया को मजबूत करना
- राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी को सभी रिएक्टिव मामलों की अनिवार्य सूचना
हाई-रिस्क ब्लड बैंकों पर रहेगी खास नजर
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब रिस्क-बेस्ड इंस्पेक्शन किए जाएंगे, जिसमें उन ब्लड बैंकों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां मरीजों की सुरक्षा को सबसे अधिक खतरा है।
राजस्थान जैसे कुछ राज्यों में ELISA टेस्टिंग और रिकॉर्ड-कीपिंग में खामियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये घटनाएं ब्लड सेफ्टी सिस्टम में “सिस्टम फेल्योर” की ओर इशारा करती हैं, खासकर उन कमजोर मरीजों के लिए जो नियमित रूप से सरकारी ब्लड बैंकों पर निर्भर हैं।
सरकार ला सकती है नया कानून
केंद्र सरकार राष्ट्रीय रक्त संचरण विधेयक, 2025 पर भी विचार कर रही है, ताकि पूरे देश में एक समान और सख्त नियम लागू किए जा सकें। प्रभावित बच्चों को एंटी-रेट्रोवायरल उपचार दिया जा रहा है और डोनर्स की ट्रेसिंग का काम भी जारी है।
सरकार का कहना है कि इस देशव्यापी कार्रवाई का उद्देश्य ब्लड ट्रांसफ्यूजन सिस्टम में जनता का भरोसा बहाल करना और किसी भी तरह की लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस सुनिश्चित करना है।

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