November 5, 2026

24x7breakingpoint

Just another WordPress site

अंधकार को मात देकर दौड़ रहा हरिद्वार का लाल जतिन शर्मा, पदकों से रोशन कर रहे उत्तराखंड का नाम

बचपन में सड़क हादसे ने छीन ली आंखों की रोशनी, लेकिन हौसले को नहीं कर पाया कमजोर; राष्ट्रीय स्तर पर कई कांस्य पदक जीतकर बनाई पहचान

हरिद्वार।कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो कोई भी मुश्किल मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। इस कहावत को सच साबित कर रहे हैं हरिद्वार जिले के सहदेवपुर गांव निवासी जतिन शर्मा।

किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले जतिन पूर्ण दृष्टिहीन होने के बावजूद पैरा एथलेटिक्स में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। उनकी संघर्षपूर्ण कहानी न केवल युवाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी बताती है कि शारीरिक चुनौतियां किसी व्यक्ति के सपनों को रोक नहीं सकतीं।

जतिन के जीवन में बचपन में ही एक गंभीर सड़क दुर्घटना ने सब कुछ बदल दिया। हादसे में उनके चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। चेहरे की बनावट प्रभावित हुई, तालू में छेद हो गया और आंखों की नसें पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गई। हादसे से पहले जतिन एंजल्स एकेडमी में पढ़ाई करते थे और प्रेप कक्षा में प्रथम स्थान हासिल कर चुके थे। लेकिन इस दुर्घटना के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई।

इसके बावजूद जतिन ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। आज वे घर में स्पर्श और मानसिक अनुमान के आधार पर स्वतंत्र रूप से चलते हैं। अपनी दैनिक जरूरतों और खानपान का प्रबंधन स्वयं करते हैं। इतना ही नहीं, मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल भी स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर की मदद से करते हैं।

**शिक्षा के साथ खेल के मैदान में भी हासिल की उपलब्धियां**

जतिन ने देहरादून स्थित राष्ट्रीय दृष्टिदिव्यांगजन संस्थान से अच्छे अंकों के साथ 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसी दौरान खेल शिक्षक श्री नरेश सिंह नयाल ने उन्हें खेलों का शुरुआती प्रशिक्षण दिया और उनकी प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वर्तमान में जतिन दूरस्थ माध्यम से स्नातक प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहे हैं। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे हैं। खेल के प्रति उनका जुनून लगातार बरकरार है। वे हरिद्वार के रोशनाबाद स्थित खेल स्टेडियम में कोच श्री मुकेश शर्मा के मार्गदर्शन में नियमित अभ्यास कर रहे हैं।

**राष्ट्रीय स्तर पर पदकों की लगा चुके हैं झड़ी**

जतिन ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर कई महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर हरिद्वार और उत्तराखंड का गौरव बढ़ाया है।

उनकी प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं—

– **खेलो इंडिया पैरा गेम्स, नई दिल्ली (2025):** 1500 मीटर और 5000 मीटर दौड़ में दो कांस्य पदक। इस दौरान उनके सहायक धावक आयुष रहे।
– **23वीं नेशनल चैंपियनशिप, चेन्नई (2025):** 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक। सहायक धावक सुंदर सिंह रहे।
– **22वीं नेशनल चैंपियनशिप, गोवा:** 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक। सहायक धावक अविरल जैन रहे।
– **जिला खेल महाकुंभ, हरिद्वार:** वर्ष 2026 में 200 मीटर दौड़ में स्वर्ण, 2025 में रजत और 2024 में कांस्य पदक हासिल किया।

**पैरा एथलेटिक्स में सहायक धावक की भी होती है अहम भूमिका**

पूर्ण दृष्टिहीन श्रेणी की दौड़ में खिलाड़ी के साथ एक सहायक धावक (गाइड रनर) होता है। दोनों एक निश्चित लंबाई की गैर-लचीली डोरी के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। सहायक का काम केवल धावक को दिशा और मार्गदर्शन देना होता है। वह खिलाड़ी को न तो खींच सकता है और न ही धक्का दे सकता है। फिनिश लाइन पार करते समय खिलाड़ी का शरीर सहायक से आगे होना जरूरी होता है। छोटी दूरी की दौड़ में अलग-अलग लेन निर्धारित होती हैं, जबकि लंबी दूरी में दोनों साथ दौड़ते हैं। इस श्रेणी में जीत हासिल करने पर खिलाड़ी और उसके सहायक दोनों को समान रूप से पदक मिलता है।

**अच्छे सहायक धावक की कमी बन रही सबसे बड़ी चुनौती**

इतनी उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद जतिन के सामने अभ्यास को लेकर कई कठिनाइयां हैं। उनके लिए अपनी गति और क्षमता के अनुरूप सहायक धावक मिलना आसान नहीं है। विशेषकर सुबह के समय जब सहायक उपलब्ध नहीं होता, तब बड़े मैदान में अकेले तेज दौड़ का अभ्यास करना जोखिम भरा हो जाता है। इसके चलते कई बार उनका अभ्यास छूट जाता है, जिसका असर उनकी टाइमिंग और प्रदर्शन पर पड़ता है।

जतिन की प्रतिभा और उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें नियमित अभ्यास के लिए उपयुक्त गाइड रनर और आवश्यक सहयोग मिलना बेहद जरूरी है, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

**हौसले की उड़ान अभी बाकी है…**

जतिन शर्मा की कहानी सिर्फ पदक जीतने की कहानी नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में खुद को साबित करने के अदम्य साहस की मिसाल है। बचपन में आंखों की रोशनी खोने के बाद भी उन्होंने अपने सपनों की रोशनी बुझने नहीं दी। आज वे हर कदम पर साबित कर रहे हैं कि मंजिल तक पहुंचने के लिए आंखों से ज्यादा मजबूत इरादों की जरूरत होती है।

आइए, हम सभी जतिन शर्मा के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना करें और उन्हें अपना आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं दें, ताकि वे आगे भी इसी तरह देश और उत्तराखंड का नाम रोशन करते रहें।

About The Author