October 15, 2026

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National enterparniship challenge 2026 students show their telent

नेशनल एंटरप्रेन्योरशिप चैलेंज 2026 छात्रों ने किया योग्यता का प्रदर्शन

हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी (सम विश्वविद्यालय) के अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय में उद्यमिता प्रकोष्ठ, ई-सेल जीकेवी द्वारा ‘सेल इट लाइक ए फाउंडर’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम नेशनल एंटरप्रेन्योरशिप चैलेंज 2026 के इस चरण का अंतिम कार्यक्रम था। इसमें विद्यार्थियों ने अपनी सोच, बोलने की कला और सामान बेचने की योग्यता का प्रदर्शन किया।

National enterparniship challenge 2026 students show their telent इस प्रतियोगिता में रमन यादव ने पहला, आयुष शर्मा ने दूसरा और दीपक कुमार ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में उद्यमिता की सोच विकसित करना तथा उनके संवाद कौशल, योजना बनाने की क्षमता और ग्राहकों को सामान खरीदने के लिए मनाने की योग्यता को बढ़ाना था।

उद्यमिता प्रकोष्ठ,( ई-सेल जीकेवी ) के संयोजक युवा वैज्ञानिक डॉ लोकेश जोशी ने बताया कि प्रतियोगिता में विद्यार्थियों को तीन उत्पाद दिए गए—स्मार्टफोन, पावर बैंक और ईयरबड्स।

प्रत्येक प्रतिभागी को मंच पर आकर एक घूमता हुआ पहिया घुमाना था। पहिए के माध्यम से उन्हें इन तीन उत्पादों में से कोई एक उत्पाद यादृच्छिक रूप से मिलता था।

इसके बाद उन्हें उसी उत्पाद को निर्णायकों के सामने इस तरह प्रस्तुत करना था कि वे उसे खरीदने के लिए तैयार हो जाएँ। इस चुनौती में केवल उत्पाद की विशेषताएँ बताना ही पर्याप्त नहीं था।

प्रतिभागियों को अपनी रचनात्मक सोच, समझदारी और बोलने की कला से निर्णायकों को प्रभावित करना था। उनके संवाद कौशल, ग्राहकों की जरूरतों को समझने, बिक्री करने और कठिन सवालों का जवाब देने की क्षमता का भी मूल्यांकन किया गया।

कार्यक्रम में निर्णायक के रूप में डॉ. प्रवीण पांडेय और श्री आयुष कुमार सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिभागियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया।

इस अवसर पर संकायाध्यक्ष प्रो मयंक अग्रवाल ने कहा कि ई-सेल जीकेवी का उद्देश्य विद्यार्थियों को नए विचारों के साथ आगे बढ़ने, समस्याओं का समाधान खोजने और अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

इसी उद्देश्य से पहले भी यूरेका, स्टार्टअप मास्टर क्लास, गेस थिंक विन, लिंक्डइन प्रेजेंटेशन और स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन जैसी गतिविधियाँ आयोजित की जा चुकी हैं जिससे विद्यार्थियों के अंदर कौशल का विकास हो सकें | वर्तमान का युग डिजिटल का युग है | इस युग में बाजारीकरण का बोलबाला है | प्रोडक्ट को बनाना आसान है लेकिन उसका बाजारीकरण करना आसान नहीं है |
कार्यक्रम के निर्णायक डॉ प्रवीण कुमार पाण्डेय ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जो कुछ करना चाहता है उसकी जानकारी आधी – अधूरी नहीं होनी चाहिए | अधूरा ज्ञान से किसी भी प्रोडक्ट को बेचा नहीं जा सकता है | हर प्रोडक्ट को बेचने के लिए एक समुदाय खड़ा करना पड़ता है | जब समुदाय किसी प्रोडक्ट को खरीदता तो वह कंपनी का सदा के लिए ग्राहक बन जाता है |
डॉ पंकज कौशिक सहायक कुलसचिव ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से विद्यार्थियों के अंदर नई सोच का प्रादुर्भाव पैदा होता है | समय – समय पर ई सेल के द्वारा इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है

आयुष कुमार सिंह सहायक प्रोफेसर ने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह सीखने का अवसर मिला कि किसी भी व्यवसाय की सफलता के लिए केवल अच्छा उत्पाद या विचार होना पर्याप्त नहीं है। उसे सही तरीके से प्रस्तुत करना, ग्राहकों की जरूरतों को समझना और उन्हें उत्पाद खरीदने के लिए प्रेरित करना भी आवश्यक है। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और व्यावसायिक समझ विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास रहा।

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