भारत का मेडिकल डिवाइस बाजार 2030 तक 50.1 बिलियन डॉलर पर पहुंचेगा, रिपोर्ट अनुमान
नई दिल्ली। भारत का मेडिकल डिवाइस (Medical Devices) उद्योग तेज़ी से विकास के पथ पर अग्रसर है।
फरवरी 2026 की रूबिक्स इंडस्ट्री इनसाइट्स (Rubix Industry Insights) रिपोर्ट के अनुसार, भारत का मेडिकल डिवाइस बाजार वर्ष 2030 तक 50.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है।
वर्तमान में 2025 में इसका आकार 15.2 बिलियन डॉलर आंका गया है, जो 2025-2030 के दौरान 26.9% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ने का अनुमान है।
📊 साल-दर-साल अनुमान (Market Forecast)
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रिपोर्ट के मुताबिक:
- 2024: 12 बिलियन डॉलर
- 2025: 15.2 बिलियन डॉलर
- 2026: 19.3 बिलियन डॉलर
- 2027: 24.5 बिलियन डॉलर
- 2028: 31.1 बिलियन डॉलर
- 2029: 39.5 बिलियन डॉलर
- 2030: 50.1 बिलियन डॉलर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तेज़ वृद्धि से भारत का वैश्विक बाजार में हिस्सा 1.65% से बढ़कर 10-12% तक पहुंच सकता है।
तेजी के प्रमुख कारण
सरकारी नीतियां और प्रोत्साहन
राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति (NMDP) 2023 के तहत भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
- PLI (Production Linked Incentive) योजना के तहत FY2026-27 तक 34.2 अरब रुपये का निवेश
- 22 ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स
- MRI/CT स्कैनर, लीनियर एक्सेलेरेटर और इम्प्लांट जैसे हाई-वैल्यू उत्पादों का उत्पादन
- यूपी, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु में मेडिकल डिवाइस पार्कों की स्थापना
बढ़ता निवेश और निजी क्षेत्र का विस्तार
Siemens Healthineers, Philips, OMRON, Wipro GE Healthcare जैसी वैश्विक कंपनियां भारत में निवेश बढ़ा रही हैं।
हेल्थकेयर और डायग्नोस्टिक सेक्टर में भी तेजी आई है, जिससे मेडिकल उपकरणों की मांग बढ़ी है।
स्वदेशी नवाचार (Indigenous Innovation)
- स्वदेशी MRI स्कैनर
- IIT कानपुर द्वारा विकसित कृत्रिम हृदय ‘हृदयंत्र’
- रोबोटिक सर्जरी सिस्टम
इन पहलों से हाई-टेक सेगमेंट में आयात पर निर्भरता कम करने का प्रयास हो रहा है।
व्यापार समझौते और निर्यात
फरवरी 2026 में भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी आयात शुल्क में कमी से निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।
FY2025 में निर्यात 4.1 बिलियन डॉलर रहा, जबकि आयात 8.6 बिलियन डॉलर रहा।
चुनौतियां भी कम नहीं
- हाई-टेक उपकरणों में 60-80% आयात निर्भरता
- प्रति व्यक्ति मेडिकल डिवाइस खर्च केवल 3 डॉलर (वैश्विक औसत 47 डॉलर)
- घरेलू कंपनियों के सामने स्केल और प्रतिस्पर्धा की चुनौतियां
हालांकि सरकार अगले पांच वर्षों में आयात निर्भरता 50% से नीचे लाने का लक्ष्य रखती है।
आगे का रास्ता
बढ़ता हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर, मेडिकल टूरिज्म, जीनोमिक्स आधारित डायग्नोस्टिक्स और बुजुर्ग आबादी की बढ़ती संख्या इस सेक्टर को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत आने वाले वर्षों में एक प्रमुख वैश्विक मेडटेक हब बन सकता है।


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