राज्य में विकास को मिली नई गति: बहु-क्षेत्रीय परियोजनाओं को मिली स्वीकृति
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने राज्य के समग्र विकास को नई दिशा देते हुए पर्यटन, परिवहन, पंचायती राज एवं खेल अवसंरचना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है।
इन निर्णयों से जहां आधारभूत सुविधाओं को मजबूती मिलेगी, वहीं रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।
हरिद्वार गंगा कॉरिडोर को मिली गति
‘नॉर्थ हर-की-पौड़ी डेवलपमेंट वर्क्स’ के तहत ₹66.34 करोड़ की परियोजना को व्यय वित्त समिति द्वारा मंजूरी दी गई है। यह परियोजना भारत सरकार की SASCI योजना के अंतर्गत स्वीकृत है।
प्रथम चरण में ₹10 करोड़ जारी करने का प्रस्ताव भेजा गया
है, जिससे हर की पौड़ी क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार होगा।
चारधाम यात्रा के लिए आधुनिक निगरानी केंद्र
राजधानी देहरादून में ‘चारधाम मॉनिटरिंग एंड इंसिडेंट रिस्पॉन्स सेंटर’ की स्थापना को मंजूरी दी गई है। ₹357.84 लाख की लागत से बनने वाला यह केंद्र यात्रियों की सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन और आपदा प्रतिक्रिया को सुदृढ़ करेगा।
परियोजना का क्रियान्वयन उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम द्वारा किया जाएगा।
पंचायती राज संस्थाओं को ₹133.68 करोड़ की पहली किश्त जारी
वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप ₹133.68 करोड़ की ‘टाइड ग्रांट’ जारी की गई है।
- ग्राम पंचायत: 75%
- क्षेत्र पंचायत: 10%
- जिला पंचायत: 15%
यह राशि पेयजल, स्वच्छता, वर्षा जल संचयन एवं ODF स्थिति बनाए रखने में उपयोग होगी। सभी भुगतान IFMS प्रणाली के माध्यम से 10 कार्य दिवसों के भीतर सुनिश्चित किए जाएंगे।
खेल अवसंरचना को मिलेगा नया आयाम
SASCI योजना के तहत खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए अहम प्रस्ताव स्वीकृत:
- हल्द्वानी में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम को ‘खेल विश्वविद्यालय’ के रूप में विकसित किया जाएगा (₹3636.50 लाख)।
- चंपावत में ‘श्री गोलू देवता कॉरिडोर (जोन-ए)’ के प्रथम चरण हेतु ₹117.22 करोड़ की परियोजना को मंजूरी।
समग्र विकास की दिशा में सशक्त कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “विकास और विरासत के संतुलन” के साथ उत्तराखंड को पर्यटन, संस्कृति, खेल और ग्रामीण सशक्तिकरण में अग्रणी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
इन योजनाओं से राज्य में बुनियादी ढांचे का विस्तार और जनसुविधाओं में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित होगा।


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