October 25, 2026

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Newborn battling for life gets a second chance; NPPL Hospital team works wonders Critically ill patients

मौत से जंग लड़ते नवजात को मिली नई जिंदगी, NPPL Hospital ने किया कमाल

दो अस्पतालों से रेफर होकर एमसीएच विंग एनपीपीएल पहुंचा गंभीर नवजात, डॉक्टरों की टीम ने छह दिन के उपचार के बाद बचाई जान

फेफड़ों में दूध जाने से बिगड़ी थी बच्चे की हालत, तीन दिन वेंटिलेटर और तीन दिन सेमी-वेंटिलेटर पर रखकर किया गया उपचार

हरिद्वार। चिकित्सा क्षेत्र में गंभीर परिस्थितियों के बीच समय पर उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सकों की भूमिका का एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है।

Newborn battling for life gets a second chance; NPPL Hospital team works wonders Critically ill patientsहरिद्वार के एमसीएच विंग एनपीपीएल हॉस्पिटल में अत्यंत गंभीर स्थिति में लाए गए एक नवजात बच्चे को चिकित्सकों की टीम ने छह दिनों के गहन उपचार के बाद स्वस्थ कर उसके माता-पिता को सौंप दिया।

बच्चे की हालत इतनी गंभीर थी कि उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी और शरीर में ऑक्सीजन की कमी के कारण वह नीलापन लिए हुए था।

बच्चे को इससे पहले दो अस्पतालों से रेफर किया जा चुका था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कामिनी के नवजात शिशु (Baby of Kamini) को गंभीर अवस्था में एमसीएच विंग एनपीपीएल हॉस्पिटल लाया गया था।

अस्पताल पहुंचने के समय बच्चा हांफ रहा था और उसके शरीर पर सायनोसिस यानी ऑक्सीजन की कमी के कारण Newborn battling for life gets a second chance; NPPL Hospital team works wonders Critically ill patientsनीलापन दिखाई दे रहा था।

चिकित्सकीय जानकारी के मुताबिक, फेफड़ों में दूध चले जाने के कारण बच्चे की सांस लेने की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई थी और वह रेस्पिरेटरी फेल्योर की स्थिति की ओर बढ़ रहा था।

बच्चे की गंभीर हालत को देखते हुए अस्पताल की एनआईसीयू टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया।

डॉ. विकास गुप्ता के नेतृत्व में चिकित्सकों ने बच्चे की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी और उसे सांस लेने में सहायता देने के लिए वेंटिलेटर पर रखा।

बच्चे को लगातार तीन दिन तक वेंटिलेटर पर उपचार दिया गया। इसके बाद स्थिति में सुधार होने पर अगले तीन दिन तक सेमी-वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखकर इलाज जारी रखा गया।

छह दिनों तक चले गहन उपचार और चिकित्सकीय निगरानी के बाद बच्चे की हालत में सुधार हुआ और उसे स्वस्थ अवस्था में माता-पिता को सौंप दिया गया।

गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचने वाले बच्चे के स्वस्थ होने से परिजनों को बड़ी राहत मिली।

डॉ. विकास गुप्ता के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने किया उपचार

इस मामले में डॉ. विकास गुप्ता के नेतृत्व में एनआईसीयू टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उपचार करने वाली टीम में डॉ. मोहम्मद सलमान, डॉ. शुभम, डॉ. अक्षत और डॉ. स्नेहा भी शामिल रहे।

टीम ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए निरंतर चिकित्सकीय देखभाल और श्वसन संबंधी सहायता उपलब्ध कराई।

नेहरू कॉलोनी, सलेमपुर के रहने वाले हैं बच्चे के माता-पिता

बच्चे के पिता राहुल कुमार हैं। परिवार हरिद्वार के नेहरू कॉलोनी, सलेमपुर क्षेत्र का निवासी है। बच्चे के स्वस्थ होने के बाद परिवार को बड़ी राहत मिली।

यह मामला दर्शाता है कि नवजात शिशुओं की गंभीर स्थिति में समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा, एनआईसीयू की सुविधाएं और निरंतर निगरानी कितनी महत्वपूर्ण होती है।

हालांकि, नवजात की ऐसी परिस्थितियों में उपचार का परिणाम उसकी स्थिति और चिकित्सकीय प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है।

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