3 साल में 211 दवाइयों को किया गया बैन जिसमें 39 पशु उपयोग की दवा शामिल
CDSCO की कार्रवाई, असुरक्षित और अवैज्ञानिक FDC दवाएं निशाने पर
नई दिल्ली। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने पिछले तीन वर्षों (2023–2025) में बड़ा कदम उठाते हुए मानव उपयोग की 172 दवाओं और पशु उपयोग की 39 दवाओं पर प्रतिबंध लगाया है। यह जानकारी केंद्र सरकार ने लोकसभा में साझा की।
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 6 फरवरी 2026 को संसद में लिखित उत्तर के माध्यम से बताया कि प्रतिबंध मुख्य रूप से उन दवाओं पर लगाया गया है।
जो असुरक्षित, अप्रूव्ड न होने वाली या अवैज्ञानिक फिक्स्ड डोज़ कॉम्बिनेशन (FDCs) हैं और मानव या पशु स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं।
वर्ष-वार आंकड़े
- 2023: 14 मानव उपयोग, 2 पशु उपयोग दवाएं प्रतिबंधित
- 2024: 157 मानव उपयोग, 1 पशु उपयोग दवा प्रतिबंधित
- 2025: 1 मानव उपयोग, 36 पशु उपयोग दवाएं प्रतिबंधित
कुल प्रतिबंध:
- मानव उपयोग – 172 दवाएं
- पशु उपयोग – 39 दवाएं
कानूनी आधार और कार्रवाई
इन प्रतिबंधों को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत लागू किया गया है, जिसके अनुसार प्रतिबंधित दवाओं का निर्माण, बिक्री और वितरण दंडनीय अपराध है।
- दवाओं के सक्रिय घटकों में बदलाव के लिए CDSCO की पूर्व अनुमति अनिवार्य है।
- प्रवर्तन की जिम्मेदारी राज्यों की स्टेट लाइसेंसिंग अथॉरिटीज़ (SLAs) पर है।
- सरकार ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 में संशोधन कर ब्रांड नामों में भ्रम और धोखाधड़ी रोकने के उपाय मजबूत किए हैं।
कुछ मामलों में प्रतिबंधित FDC दवाओं को लेकर उच्च न्यायालयों में कानूनी चुनौतियां भी सामने आई हैं, जहां अंतरिम राहत दी गई है। सरकार ने यह भी माना कि कुछ प्रतिबंधित दवाएं बाजार में बिकती रहती हैं, जिन पर राज्य स्तर पर कार्रवाई की जाती है।
जनस्वास्थ्य पर प्रभाव
सरकार के अनुसार यह कदम जोखिमपूर्ण दवाओं को हटाने, जनस्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दवा निर्माताओं की मनमानी पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है। CDSCO और स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार निगरानी रख रहे हैं, जो भारत की दवा सुरक्षा के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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