आयुष और हर्बल उत्पादों के निर्यात में गिरावट, दिसंबर तिमाही में 16% तक कमी
नई दिल्ली। आयुष और हर्बल उत्पादों को लेकर विश्व पटल पर गिरावट नजर आ रही है।
वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में आयुष और हर्बल उत्पादों के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में निर्यात 7.42% घटकर 471.67 मिलियन डॉलर रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 509.49 मिलियन डॉलर था।
मात्रा के स्तर पर भी निर्यात 1.29% घटकर 91,493 मीट्रिक टन रहा।
अक्टूबर से दिसंबर 2025 की तिमाही में निर्यात में 16.14% की गिरावट दर्ज हुई और यह 137.66 मिलियन डॉलर रहा, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह 164.15 मिलियन डॉलर था।
इसी तरह दिसंबर 2025 में मासिक निर्यात लगभग 10.2% घटकर 52.15 मिलियन डॉलर दर्ज किया गया।
रुपये के संदर्भ में भी गिरावट देखने को मिली। वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में निर्यात 3.78% घटकर 4,111.5 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 4,272.93 करोड़ रुपये था। दिसंबर तिमाही में 11.45% और केवल दिसंबर माह में 4.8% की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल–जून 2025) में 6% की मामूली वृद्धि देखी गई थी और निर्यात 175.7 मिलियन डॉलर तक पहुंचा था।
इससे पहले वित्त वर्ष 2023-24 में आयुष और हर्बल उत्पादों के निर्यात में 3.6% की वृद्धि दर्ज की गई थी।
आयुष उत्पादों के वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए आयुष निर्यात संवर्धन परिषद (Ayushexcil) का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य आयुर्वेद, होम्योपैथी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और यूनानी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना और व्यापार से जुड़े मुद्दों का समाधान करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक मांग, नियामकीय चुनौतियों और बाजार प्रतिस्पर्धा जैसे कारकों का असर आयुष निर्यात पर पड़ा है। आने वाले महीनों में नीतिगत सहयोग और बाजार विस्तार से स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

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