उत्तराखंड कैबिनेट के अहम फैसले: ड्रग फ्री मुहिम को बल
दैनिक श्रमिकों को न्यूनतम वेतन और ईएसआई ढांचे का विस्तार
देहरादून। उत्तराखंड राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
सरकार ने ड्रग फ्री अभियान को और मजबूत करने, वन विभाग के दैनिक श्रमिकों को न्यूनतम वेतन देने, ईएसआई चिकित्सा सेवा ढांचे का विस्तार करने समेत विभिन्न योजनाओं की अवधि बढ़ाने और विधायी संशोधनों को मंजूरी दी।
ड्रग फ्री मुहिम को मजबूती
कैबिनेट ने एंटी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स के लिए अलग ढांचा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए राज्य मुख्यालय में पहली बार 22 पदों के सृजन को मंजूरी दी है।
इनमें एक पुलिस उपाधीक्षक, दो ड्रग निरीक्षक, एक निरीक्षक, दो उपनिरीक्षक, चार मुख्य आरक्षी, आठ आरक्षी और दो चालक शामिल हैं। टॉस्क फोर्स का गठन वर्ष 2022 में किया गया था।
वन विभाग के दैनिक श्रमिकों को राहत
मंत्रिमंडल ने वन विभाग और वन विकास निगम में कार्यरत 589 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को न्यूनतम 18 हजार रुपये वेतन देने का निर्णय लिया है। विभाग में कुल 893 दैनिक श्रमिक हैं, जिनमें से 304 को पहले से न्यूनतम वेतन का लाभ मिल रहा है।
ईएसआई चिकित्सा सेवा नियमावली 2026 लागू
कैबिनेट ने “उत्तराखंड कर्मचारी राज्य बीमा योजना, श्रम चिकित्सा सेवा नियमावली 2026” को प्रख्यापित किया है। इसके तहत कुल 94 पद स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 76 चिकित्सा अधिकारी, 11 सहायक निदेशक, 6 संयुक्त निदेशक और 1 अपर निदेशक शामिल हैं। इससे पहले केवल एक सीएमओ और 13 चिकित्सा अधिकारी के पद थे।
सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की अवधि बढ़ी
मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की कार्यान्वयन अवधि को वित्तीय वर्ष 2025-26 यानी 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है। भविष्य में केंद्र सरकार द्वारा अवधि बढ़ाए जाने पर राज्य में भी इसे स्वतः विस्तारित माना जाएगा।
कारागार संशोधन विधेयक को मंजूरी
कैबिनेट ने उत्तराखंड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रारूपण को स्वीकृति दी है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप “आदतन अपराधी” शब्द की परिभाषा में संशोधन किया जाएगा। संशोधन विधेयक को आगामी विधानसभा सत्र में पुनः प्रस्तुत किया जाएगा।
बोनस संशोधन विधेयक वापस लेने का निर्णय
कोविड-19 काल में लाए गए बोनस संदाय (उत्तराखंड संशोधन) विधेयक, 2020 पर केंद्र सरकार की असहमति और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने इसे विधानसभा से वापस लेने का निर्णय लिया है।

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