पायल सिनेमा हरिद्वार – मालिकाना हक दिए जाने की मांग को लेकर भटक रहे अरुण
हरिद्वार। उत्तर प्रदेश चलचित्र निगम द्वारा संचालित पायल सिनेमा घर को लेकर स्वामित्व जाता रहे अरुण चौहान ने प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि 1997 में टेंडर के तहत 36 लाख में सरकार द्वारा नीलामी के माध्यम से पायल सिनेमा घर उनके पिता ने खरीदा था।
नीलामी के बाद उन्हें कब्जा भी दिला दिया गया था। उन्होंने लंबे समय तक सिनेमा का संचालन किया और सरकार को राजस्व भी दिया जाता रहा है।
अरुण चौहान ने एग्रीमेंट की कापी व अन्य कागजात दिखाते हुए कहा कि नीलामी के बाद पूरी रकम का भुगतान करने के बाद उन्हें मालिकाना हक दिया जाना चाहिए।
लेकिन भेल प्रबंधिका द्वारा पायल सिनेमा को लेकर विवाद उत्पन्न कर उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। जबकि सिनेमा घर से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
अरूण चौहान ने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने कोर्ट की शरण भी ली है। जिलाधिकारी को भी इस संबंध में सभी पत्रावली और कागजात दिखा चुके हैं।
लेकिन भेल प्रबंधन द्वारा उन्हें नोटिस दिए जाने के बाद विवाद उत्पन्न हो गया है।
स्वामित्व को लेकर वह लगातार उत्तर प्रदेश एवं हरिद्वार जिला प्रशासन से पत्राचार कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि सिनेमा घर का मालिकाना हक उन्हें सौपा जाए।


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