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उप शिक्षाधिकारी(DEO) ऑफिस में दलालों का वर्चस्व

हरिद्वार। उत्तराखंड की जीरो टॉलरेंस सरकार के राज में शिक्षा विभाग अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। उप शिक्षाधिकारी(DEO) कार्यालय की बेलगाम बाबूगिरी ने शिक्षकों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं साथ ही इनको कुछ दलाल शिक्षक नेताओं का संरक्षण प्राप्त है। स्थिति यह है कि शिक्षकों के एरियर लंबित हैं, वेतन का अता-पता नही ओर शिक्षक चयन वेतनमान की बाट जोह रहे हैं।
यूँ तो शिक्षा विभाग के हाल ही बुरे हैं बाबूगिरी अफसरों पर हावी है तथा शिक्षक धक्के खाने को मजबूर हैं। सभी ब्लॉक के मुक़ाबले विकास खंड बहादराबाद का उपशिक्षा कार्यालय किसी न किसी बात को लेकर चर्चा में रहता है। इस पूरे कार्यालय को खासी रिपेयरिंग की आवश्यकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ दलाल शिक्षक नेताओं एवं बाबुओं के गठजोड़ ने पूरी व्यवस्था को ही पटरी से उतार दिया है। स्थिति इतनी विकट है कि अभी तक मार्च माह के वेतन का ही शिक्षकों को भुगतान नही हो पाया है। नया साल शुरू होने के बाद से ही वेतन को लेकर मुश्किलें  बढ़ी हैं तथा इसका निर्धारण भी ठीक से नही हो पा रहा है। इसके साथ ही सैकड़ों की संख्या ऐसे शिक्षकों की है जो 10 वर्ष की सेवाएं पूर्ण कर चुके हैं। नियमानुसार उनको चयन वेतनमान दिया जाना है। लक्सर, रुड़की, भगवानपुर आदि में यह कार्य बहुत पहले हो चुका है परंतु यहां फ़ाइल आगे बढ़ने का नाम ही नही ले रही है। नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षक ने बताया कि दर्जनों टीचर्स के कई सालों के एरियर लंबित हैं जिन्होंने चढ़ावा चढ़ाया ओर शिक्षक नेताओं से संपर्क किया उनका भुगतान हो चुका है जबकि पैसे न देने वालो को रोज टरकाया जा रहा है। कुल मिलाकर बहादराबाद ब्लॉक का उप शिक्षाधिकारी कार्यालय लूट का अड्डा बन चुका है। मनमानी के चलते सबसे अधिक शिक्षक संख्या वाले इस ब्लॉक के शिक्षक खून के आंसू रोने को मजबूर हैं तथा उनकी सुध लेने वाला कोई नही है। बताते चलें कि कुछ सीआरसी ओर स्कूल न जाकर विभिन्न तरीकों से यहां  संलग्न रहने वाले शिक्षक एवं कुछ शिक्षक नेताओं के गठजोड़ ने निरंकुशता को बढ़ावा दिया है। कहने को संगठन शिक्षकों के हितैषी बनते हैं पर सबसे ज्यादा शोषण उनके द्वारा ही शिक्षकों का करवाया जा रहा है।