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सब्सिड़ी मंत्रीमंडल की मुहर,जानिए और क्या रहे खास निर्णय

सब्सिड़ी मंत्रीमंडल की मुहर,जानिए और क्या रहे खास निर्णय

उत्तराखंड में दाल पर सब्सिड़ी मंत्रीमंडल की मुहर,जानिए और क्या रहे खास निर्णय

देहरादून(अरुण शर्मा)। त्रिवेंद्र सरकार ने बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कई नीतिगत मामलों पर मंजूरी दी। आज कैबिनेट में कुल 14 प्रस्ताव आये जिस पर मंत्रीमंडल ने 12 प्रस्तावों पर अपनी सहमति दी। प्रदेश में दाल पर सब्सिडी देने के लिए मुख्यमंत्री दाल पोषित योजना को मंजूरी दी गयी है। जिसमें प्रत्येक कार्ड पर 15 रुपये की छूट दी जायेगी।

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बुधवार को सचिवालय मे संपन्न कैबिनेट मे 14 मुद्दे चर्चा के लिए रखे गये थे। जिनमें से 12 मुद्दों पर मंत्रीमंडल ने सहमति दी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण मुख्यमंत्री दाल पोषित योजना चलाये जाने पर कैबिनेट ने अपनी स​हमति दी। इसमे राज्य के 238000 कार्ड धारकों को प्रति कार्ड पर 2 किलो दाल पर 15 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। छूट वाली दाल में चना, मसूर, मलका होगी।

राजकीय महाविघालय में गेस्ट फैकल्टी को 35000 दिए जायेंगे । उन्हे महीने मे 40 पीरियड लेने होंगे।इन 40 पीरियड को तय करना महाविघालय का काम होगा।

सीधी भर्ती के पदों पर आरक्षण की फिर से व्यवस्था के लिए यशपाल आर्य की अध्यक्षता में एक कमेटी बनायी गयी है जिसमें अरविंद पाण्डेय और सुबोध उनियाल भी इस समिति में शामिल होगें। इस कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही इसमें आगे के निर्णय लिया जायेगा। मोटर यान अधिनियम मे संशोधन किया गया है।

कैबिनेट के अन्य निर्णय———

—-उत्तराखण्ड सार्वजनिक रूप से विकलांग, स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी के आश्रितों एवं भूतपूर्व सैनिकों के आरक्षण व्यवस्था में संशोधन करते हुये पुत्र/पुत्री को भी लाभ देने का निर्णय लिया गया है।
—- सचिवालय स्तर पर चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग का एकीकरण किया गया है। मूल विभाग यथावत रहेंगे।
—– उत्तराखण्ड मोटरयान कराधान सुधार अधिनियम-2003 एक्ट में संशोधन के अन्तर्गत अधिक सवारी पर प्रति सीट 25 रूपये और वातानुकुलित के लिए 40 रूपये जुर्माने के वृद्धि दर को वापस लिया गया। पूर्व व्यवस्था के अनुसार अधिक सवारी पाये जाने पर 5 गुना टैक्स जुर्माना लिया जायेगा। इसमें ड्राइवर कन्टेक्टर शामिल नहीं रहेगा।
—-शासन स्तर पर योजानओं परियोजनाओं के गठित वित्त समिति मुख्य सचिव द्वारा नामित प्रमुख सचिव अध्यक्ष होंगे। अन्य विभागीय सचिव भी शामिल रहेंगे।
—-सचिवालय स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी दो अलग-अलग विभागों का एकीकरण किया गया है। मूल विभाग यथावत रहेंगे। अब यह सूचना विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग होगा।
—उत्तराखण्ड लोक सेवा अभिकरण शिकायतों का कार्य सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को दिया गया है।
—2009 में आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय अधिनियम के अन्तर्गत डा. मृत्युन्जय मिश्रा के संविलियन को समाप्त कर दिया गया है।
—उत्तराखण्ड लेखा परीक्षा अधीनस्थ सेवाएं कएक्ट में संशोधन किया गया है।
—उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार बनाए गये मानक के अनुसार, मा. उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति को चिकित्सा प्रतिपूति देने का निर्णय लिया गया।