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जन सेवा को अग्रसर अमृत संसाधनम् का Portal हुआ लांच

हरिद्वार (विकास चौहान )। आयुर्वेद के क्षेत्र में गत दो दशकों से कार्य करने वाली संस्था अमृत संसाधनम्  एक कदम और आगे बढते हुए एक आयुर्वेद से सम्बन्धित पोर्टल (Portal)  का लोकार्पण करने जा रही ​है जिसके माध्यम से आम जन मानस की और अधिक सेवा की जा सकें। संस्था के निदेशक वैद्य सुभाष चन्द्र नायक ने कहा कि वैसे तो संस्था गत 20 वर्षो से जन सेवा का कार्य कर रही है और इस पोर्टल (Portal) के माध्यम से संस्था हर घर तक पहुंच बनाकर और अधिक जन सेवा का कार्य करना चाहती है।


जगजीतपुर के प्रगति विहार में गत 20 वर्षो से आयुर्वेद के माध्यम से लोगों के स्वाथ्य सेवा कर संस्था अमृत संसाधनम् एक कदम और आगे बढ़ते हुए, सोसलमीडिया के माध्यम से जन जन तक पहुच बना कर अपने सेवा कार्य को और अधिक विस्तार दे रही है। संस्था के निदेशक वैद्य सुभाष चन्द्र नायक ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि संस्था एक पोर्टल प्रारम्भ करने जा रही है जिसका उद्देश्य आयुर्वेद के माध्यम से संस्था द्वारा किए जा रहे सेवा कार्य को हर आम आदमी की पहुंच में लाकर उसके स्वास्थ्य लाभ की कामना करना है। इस अवसर पर वैद्य सुभाष चन्द्र नायक ने बताया कि आज के वैज्ञानिक युग में चिकित्सा का विश्लेषण करें तो औषधि चिकित्सा, शल्य क्रिया व्यवस्था, पैथोलाॅजिकल टैस्ट और औषधि में ही माना जाता है। परन्तु इसमें किसी व्यक्ति को दीर्घायु होना पूर्णरुप से दिखायी नहीं देता। समाज में सभी के स्वास्थ्य की रक्षा तथा किसी भी प्रकार का शरीर में विकार आने पर आयुर्वेद में वर्णित ऋतुचर्या, दिनचर्या, आहार, विहार, पथ्य, अपथ्य एवं स्वस्थवृत आदि को अनुकरण करके स्वास्थ्य लाभ देना अमृतसंधानम् का मुख्य उद्देश्य है। 19 वीं सदी के पूर्वार्द्ध में शहरी सभ्यता का विकास, जनसंख्या वृद्वि ,जंगलों, वृक्षों को लगातार समाप्त करना, परोक्ष्य रुप से कीटनाशक तथा कैमिकल युक्त आहार, अभिषयंधिकारक बासी एवं बिष्टम्भी भोजन (फस्ट फूड, जंक फूड आदि) का सेवन के कारण अनेक प्रकार के नए रोगों की लगातार उत्पत्ति समाज में दिखायी दे रही है। जो कि सहज में नियंत्रण सम्भव नहीं होता है।
‘अमृतसंधानम्‘ इसी प्रकार रोगों की वृद्धि को ध्यान में रखते हुए शुद्ध एवं प्रभावकारी औषधियों का निर्माण हेतु सतत् प्रत्यनशील है। हमारी संस्था चिकित्सा शिविर के माध्यम से प्रयोगात्मक रुप से विगत पांच वर्षो से सफलता पूर्वक चिकित्सा कार्य करते आ रही है। लाखों जीर्ण एवं असाद्धय रोगियों की सफलता पूर्वक चिकित्सा के अनुभव के कारण हमारे स्वास्थ सेवा कार्यक्रम तीव्र गति से लोकप्रिय होता जा रहा है। रोगियों की आरोग्यता, हमारी संस्था की विश्वसनीयता का कारण बना है। शास्त्रोक्त एवं अनुभव आधारित औषधियों के प्रयोग द्वारा जीर्ण रोगों के उपचार में सफलता मिल रही है। आयुर्वेद का विकास अष्टांग आयुर्वेद के रुप में हुआ था। समस्त रोगों ( हेतु, लक्षण एवं औषधि ज्ञान) त्रिदोष एवं सप्तधातु के विकार को आधार से चिकित्सा करना हमारी संस्था का लक्ष्य है।
आने वाले नये चिकित्सकों तथा जन समाज को आयुर्वेद के प्रति विश्वास बढ़ाने हेतु उनकों चिकित्सा में पारंगत करना हमारा लक्ष्य है। जिससे समाज में आयुर्वेद एक वैकल्पिक चिकित्सा न होकर मनुष्य समाज के मुख्य स्वस्थ्य का आधार के रुप से प्रतिष्ठापित हो। आयुर्वेद क्षेत्र में कार्य करने वाले चिकित्सक बन्धुओं को हमारी संस्था उत्साहवर्धन करती आ रही हैं। ‘‘स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम् आतुरस्य विकार प्रंशमनम् च‘‘ को धर्म, कर्म एवं लक्ष्य मानकर अर्हनिशः सेवामहे भावना से हमारी टीम कार्यरत है। सर्वे सन्तु निरामयाः की कामना सहित।

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